बुधवार, 25 फ़रवरी 2009

आखिर कितने हैं ब्लॉग एग्रीगेटर?


मैंने हाल ही में ब्लॉग शुरू किया है और एक सप्ताह पूर्व तक तो मैं ब्लॉग एग्रीगेटर का मतलब भी नहीं जानती थी। अब यह नौबत आ गयी है कि पांच एग्रीगेटरों में पंजीकरण करवा चुकी हूँ जबकी ब्लॉग पर दिखाने को भी मुश्किल से पांच ही पोस्ट हैं! वैसे याद करुँ तो मेरा ब्लॉग लिखने का कारण था स्वान्तः सुखाय: -- केवल हिंदी भाषा से जुड़े रहने के लिए शुरू किया था चिट्ठा; न की फौलोअर, समर्थक या प्रशंसक पाने के लिए। तो फिर ये एग्रीगेटरों से जुड़ने की लत कैसे और क्यों लगी?



अब तो ब्लॉग जगत के नए-पुराने खिलाड़ियों से यही विनम्र अनुरोध है कि कृपया बता दें कि आखिर कितने ब्लॉग एग्रीगेटर हैं हिंदी चिट्ठों के लिए? इन्टरनेट की दुनिया बहुत विशाल है और सर्च इंजन प्रयोग करने पर भी बहुत सी जानकारी छूट जाती है, इसलिए मदद मांग रही हूँ। अब या तो ये गुहार सुन लीजिए या इस लत से छुटकारा पाने का कोई उपाय बता डालिए।

(मैंने अपने लिए ब्लॉग लिखने के कुछ नियम बनाए थे जिनके अनुसार कोई भी पोस्ट दस वाक्यों से कम की नहीं होनी चाहिए। पर यहाँ तो केवल एक छोटा सा प्रश्न पूछना था जो की दरअसल शीर्षक में ही पूछ लिया था। तो दस वाक्य नहीं, यहाँ तो तीन शब्दों में ही काम चल सकता था। अरविन्द जी ने सिखाया कि तुलसीजी ने सुझाया था कि "अर्थ अमित अति आखर थोड़े" पर यहाँ उसका बिलकुल विपरीत है।)


14 comments:

हिमांशु । Himanshu 26/2/09 06:06  

अब कितने हैं इसका हिसाब तो हम भी नहीं बता सकते. जैसे आपका समय बीतता जायेगा इस चिट्ठाजगत में वैसे वैसे आपकी जानकारी बढ़ती जायेगी. और आपकी सीधी सहायता के लिये हिन्दी ब्लोग टिप्स, प्रथम जैसे ब्लोग तो हैं ही .
स्वांतःसुखाय लेखन के संदर्भ में अपनी दुविधा के लिये यहां दृष्टि डालें-
रचना का स्वांतःसुख सर्वांतःसुख भी है
साभार.

संगीता पुरी 26/2/09 08:07  

आप स्‍वांत: सुखाय लिखें या किसी अन्‍य कारण से ..... आप अवश्‍य चाहेगी कि आपके विचार अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे .... इस कारण एग्रीग्रटर की आवश्‍यकता होती है।

नीरज गोस्वामी 26/2/09 13:09  

लिखते रहिये...लोग जुड़ते रहेंगे...
नीरज

Cyril Gupta 26/2/09 14:36  

इस समय हिन्दी ब्लाग्स का सबसे लोकप्रिय एग्रीगेटर ब्लागवाणी है. अगर आप ब्लागवाणी पर हैं तो एग्रीगेटर से आने वाला 80% traffic आपके पास आ रहा है.

जैसे अभी थोड़े दिनों पहले नारी ब्लाग ने बताया (http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/2009/02/blog-post_23.html) कि उनके पास कौन कहां से आया, तो ब्लागवाणी एग्रीगेटर से 32.5% लोग पहुंचे, और निकटतम एग्रीगेटर से 6%.

मतलब अगर आप मुख्य तीन एग्रीगेटरों में पंजीकृत हैं (जैसा कि आपने कहा है), तो बाकी कि चिंता न करें उनमें होने न होने से आपके ब्लाग को कोई फर्क नहीं पड़ेगा. :).

(अरविन्द जी ने आपकी पोस्ट का लिंक देकर जवाब देने को कहा, इसलिये अपनी जानकारी अनुरूप जवाब दे रहा हूं)

Arvind Mishra 26/2/09 14:51  

हिमांशु के जवाब और उपलब्ध सूत्रों (लिंक ) से अब तक कुछ बोधत्व की प्राप्ति हो गयी होगी ? सिरिल से कहा है वे आपको एग्रीगेटरों की संख्या बता सकेंगें -आप स्वयं प्रबुद्ध हैं अतः अपने लक्ष्य स्वयं तय करें -हम क्या राय दें -अभिव्यक्ति का यह माध्यम और अपनी भाषा अच्छी लगे तो ठहरिये नहीं तो वह करिए जो आपको अच्छा लगे ! यहाँ कोई बाध्यता तो है नहीं -हाँ इतनी कम समय में आपकी यह उपलब्धि यह तो आश्वस्त करती ही है कि आपमें अहर्निश उन्नति की क्षमता है !
पर निर्णय तो आपको ही लेना है -वैसे आज भी हिन्दी भाषा को काफी लोग स्लम डाग का ही दर्जा देते हैं और हिन्दी भाषियों को गोबर पट्टी (काऊ बेल्ट ) का मानते हैं -
समय हो तो अवश्य हमसे जुडी रहें -मजा तो तब है जब दोनों दुनिया /जहां का आनंद उठाया जाय -बेस्ट आफ द बोथ वर्ल्ड्स !

HEY PRABHU YEH TERA PATH 27/2/09 02:45  

वैसे अरविन्द जी के सुझाव सही है। अरविन्दजी हिन्दिचिठ्ठाकारी के आदि पुरुषो मे से है
वैसे मैने जो जानकारी हासिल कि उसकि पुरी सुची मुप्त मे प्रेषित कर रहा हु चुकी ईमेल का पता नही है इसलिये सुची कमेन्ट बॉक्स के हवाले किये देता हु।
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शायद मे आपकि कुछ मदद कर सकता हु तो जरुर लिखे। शुभकामना।


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http://ombhiksu-ctup.blogspot.com/
ctup.bhikshu@gmail.com

Reema 2/3/09 20:46  

आप सब की टिप्पणियों के लिए धन्यवाद - मेरी दुविधा अब सुलझ गई है.

Arvind Mishra 2/3/09 21:56  

लेकिन हमारी दुविधा तो कायम है -अगली पोस्ट कब ?

Reema 3/3/09 10:36  

आप जैसे समर्पित पाठक के रहते नई प्रविष्टियों का सिलसिला जारी रहेगा.

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) 3/3/09 14:42  

रीमा जी, हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर पधारने का शुक्रिया.. आपका कमेंट बक्सा बिल्कुल उसी जगह पर है, जहां ब्लॉगर ने इसका स्थान निर्धारण किया है। यानी कि सभी कमेंट्स के बाद। रही बात हिन्दी में लिखने वाले बक्से की.. तो आप उसे लेआउट फीचर में जाकर ड्रेग एंड ड्रॉप विधि से नीचे खींच सकती हैं..

निशांत मिश्र 12/3/09 21:14  

अधिकाँश हिन्दी ब्लौगर चिट्ठाजगत और ब्लौगवाणी के जरिये ब्लॉग्स की जानकारी पाते हैं (लगभग ९०%). अपने ब्लॉग्स पर मैंने विजेट्स की भरमार रखने के बजाय जो कुछ ज़रूरी है उसी पर ध्यान दिया है. आप यदि अच्छा पोस्ट करेंगे तो गुणी पाठक आपको ढूंढ ही लेंगे. ज्यादा से ज्यादा कमेंट्स पाने की युक्तियाँ बहुत बचकानी हैं.

Reema 12/3/09 23:06  

निशांत जी, आपने बहुत ही अच्छी सलाह दी है. और हाँ, आपका ज़ेन-कथा ब्लॉग सचमुच बहुत साफ़-सुथरा और पाठक के लिए सुविधाजनक है.

उन्मुक्त 22/3/09 06:35  

हिन्दी फीड एग्रगेटर की सूची यहां है।

जसवंत लोधी 15/11/15 14:40  

शुभ लाभ ।Seetamni. blogspot. in

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