प्रभाव
किस पर किस का कितना
कब हो जाए, यह कहना
है नामुमकिन सपना
कोई मुलाक़ात, इक बात
न जाने कब किसके साथ
बन जाएँ कैसे हालात --
पुस्तक, चित्र या फिर आइना
बदल के रख दे हर माइना
समझ तो इसको मैं पाई न
कभी-कबार धुंधला एहसास
धीरे से होता आभास
बंधा जाता जीने में आस
प्रश्न चिह्न पर बहुत बड़ा
क्यों सब पे इक-सा न पड़ा?
अपनों को क्यों दिया लड़ा?
कब हो जाए, यह कहना
है नामुमकिन सपना
कोई मुलाक़ात, इक बात
न जाने कब किसके साथ
बन जाएँ कैसे हालात --
पुस्तक, चित्र या फिर आइना
बदल के रख दे हर माइना
समझ तो इसको मैं पाई न
कभी-कबार धुंधला एहसास
धीरे से होता आभास
बंधा जाता जीने में आस
प्रश्न चिह्न पर बहुत बड़ा
क्यों सब पे इक-सा न पड़ा?
अपनों को क्यों दिया लड़ा?
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